Mission

हम कौन थे ?

ज्ञान की थी पुण्य भूमि ! नालंदा , विक्रमशिला यहीं था। 
समृद्ध और गौरवशाली अतीत हमारा , 
कई देशों में फैला हुआ साम्राज्य था , थे चरित्र के धनी हम , 
होती थी हीरों की खेती यहाँ , था कुबेर का भंडार यहाँ !!

क्या हो गये हैं ?

और क्या होंगे अभी ?

"हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी !
आओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभी !!"

यही है हमारा मिशन बिहार l

संपूर्ण भारत जहाँ समाहित है, वो है बिहार। ज्ञात इतिहास में ईसा पूर्व 322 साल से लेकर स्वतंत्र भारत के राजनीतिक उथल पुथल में बिहार अपनी महत्ता दिखाई है। इसका गौरवशाली इतिहास वैदिक काल से ही शुरु होता है। इसे मगध के रूप में जाना जाता था , मगध का शासानकाल ईसा पूर्व छठी शाताब्दी में राजा बिम्बिसार के नेतृत्व में शुरु हुआ। मगध के बाद नंद और मौर्य वंश का शासन काल अपने कालखंड से आगे प्रतीत होता रहा जो अपनी सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक अपलब्धियों के लिए आज भी समय से आगे माने जाते रहे हैं।   

प्रशासन और जनता के बीच में आपसी संबंधों की प्रगाढता कैसे हो ये सर्व विदित हुआसम्राट अशोकके शासन काल के दौरान। आज का बिहार जो उस समय मगध के रुप में जाना जाता था पहला ऐसा साम्राज्य था जिसके राजा को सम्राट की उपाधि से सुशोभित किया गया था। भौगौलिक सीमाएँ अफगानिस्तान और कंधार को समाहित करते हुए, पूर्व में थाईलैण्ड, जावा और सुमात्रा सहित दक्षिण में श्रीलंका तक फैला हुआ था।सम्राट अशोक के विचारों का प्रचार प्रसार विश्व के एक तिहाई हिस्से से अधिक में था। लिखित इतिहास में जैन, और बौध धर्मों की शुरुआत यहीं से हुई। गौतम बुद्ध, भगवान महावीर और सिक्ख गुरु गुरुगोविंद सिंह की जन्म भूमि भी इसी पावन भूमि पर हुआ।

आदि अनादि काल की बात को अगर सोचे समझे तो मर्यादा पुरुषोत्म राम की कर्म भूमि रही,साथ ही  जगत जननी माँ सीता की जन्म भूमि के रुप में यह प्रदेश सर्वविदित है।अपने भक्तों की रक्षा के लिए ईश्वर का धरती पर आने की बात तो पुराणों में है।लेकिन ये वो प्रदेश है जहाँ ईश्वर अपने गज भक्त के लिए विराट रुप में हरिहर क्षेत्र में पधारे थे।

इतिहस तो भरपूर है चाणक्य, अशोक, आर्यभट्ट और शेरशाह से सराबोर है, लेकिन आधुनिक भारत और स्वतंत्रता संग्राम में जहाँ सीमाएँ सुदूर अभगानिस्तान से घटकर बंगाल और कलिंग तक सिमट गयी थी, कई मामलों में उस वक्त भी सर्वोपरि था यह प्रदेश। हरिहर क्षेत्र का मेला क्रांतिकारी गतिविधियों का केन्द्र था, ऐसे कई केन्द्र बने हुए थे, जहाँ बाबू कुंवर सिंह से लेकर सहजानंद सरस्वती, बाबा नागार्जुन , राहुल सांकृत्यायन जैसे अनोंकों लोग जो उदयीमान बिहार का स्वतंत्रता संघर्ष को दौरान प्रतिनिधित्व किया था। इनकी यादें आज भी बिहार के वक्षस्थल पर सिमटा हुआ है।

आज भले ही हमारी सीमाएँ संकुचित होकर महज 95 हजार स्कावयर किलोमीटर में पहुँच गई हैं लेकिन आपर संस्कृति की गूंज हवाओं में मौजूद है। यह जाहिर है कि बिहार मेंमैंकी जगहहमकहते हैं। तो वास्तव में यहाँ हम सब हैं। हम सभी उपेक्षा की शिकार हो रहें हैं, मजबूर होकर अपनी मर्यादित मिट्टी की सोंधी खुशबू की महक से दूर महज मुट्ठी भर अनाज और मजदूरी के लिए  अपनों से दूर जा रहें हैं। जहाँ बिहार की संस्कृति पर गर्व करते थे आज अपने ही देश में उपेक्षा सेबिहारीकहा जाना तिस्सकार से कम नहीं।हम सबके मन के अंदर अजीब से उथल पुथल मची हुई है। हर किसी के मन में है कि अपने इतिहास को फिर से पा सके,खोई प्रतिष्ठा को फिर से सम्मानित करा सके। आकाश में बिहार के नाम का पताका फिर से चहुओर फैले । मैं कि जगह हम की गूँज हो और  इस हम की गर्जना से नए बिहार का उदय हो। यह संकल्प हमबो ने ली है कि अब  नये बिहार के उदय हो, और इसकी शुरुआतमिशन बिहारके रुप पर जन जन से तक पहुँचाया जाए। यहमिशन बिहार  किसी एक व्यक्ति विशेष , किसी एक संगठन का नहीं है, ये हम सब का है जो इस प्रदेश से अपने आप को जुडा हुआ पाता है। ये संगठन आपका है, आपकी सोच को मूर्त रुप देने का काम इस संगठन का है। हम सब की चाहत है कि हर कोई इस बात को सोचे, क्था थे हम ?  कहाँ आ पहुँचे हैं हम ? इस धरती का कर्ज कैसे चुकाए हम ? एक दूसरे को थामते हुए कैसे अपने पुराने गौरव को पाएँ ?  जहाँ कहीं भी रहें अपने गौरव और इतिहास से कैसे जुड सकें ?   इन सारे मसलों को हल करने के लिए सदैव तत्पर हैमिशन बिहार। आपको आपके जमीन, इतिहास और संस्कृति से जोडे रखने के लिए मिशन बिहार हरकदम पर आपके साथ रहेगा।

जय बिहार !!